टाल-मटोल पर एक 'सर्जिकल स्ट्राइक'
प्रस्तावना:
एक सूचना-शिल्पी (Architect) के रूप में मैंने दशकों तक ऐसी डिजिटल तिजोरियां बनाई हैं जो 'सूचनाओं' को 'विकारों' से सुरक्षित रख सकें।
लेकिन आज मेरी 'अंतर्दृष्टि' समय की उस अंतिम तिजोरी की ओर मुड़ी, जिसके विधान सर्वोपरि हैं।
हम अक्सर अपना जीवन 'अस्थायी सत्रों' (Volatile Sessions) में बिताते हैं, उन वादों के भरोसे जो कल पर टिके हैं।
यह कविता टाल-मटोल पर एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' है और 'पूर्णतः' (Completeness) का एक आह्वान है। यह एक याद दिलाती है
कि समय के 'अंतिम पड़ाव' (Global Purge) से पहले, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारा 'कर्म' पूर्ण हो और हमारी 'जीवन-गाथा' अपूर्व और अखंड हो।
कविता की मुख्य विशेषताएँ :
संदेश: आशा है कि ये पंक्तियाँ आपको अपने अधूरे संकल्पों को पूरा करने और इस नव वर्ष में 'पूर्ण सत्य' (Absolute Truth) प्राप्त करने की प्रेरणा देंगी।
वो भी आया था, वो चला गया,
यह भी आया है, और चला जाएगा।
समय कफ़न की तरह है 'कुजूर',
जो धीरे-धीरे सब ढंक देगा।
समय की पूर्णता से पहले,
स्वयं पूर्ण हो जाओ।
नये वादे करने से पहले,
पुराने पूरे कर लो।
अधूरा काम है जो जीवन का,
उसे इस वक़्त पूरा कर लो।
समय पर विश्वास न करना,
यह कभी भी धोखा दे दे,
रोने से पहले...
हर काम अपना 'तमाम' कर लो।
खुशहाली तुम्हारी पूरी हो,
बिगड़ी तुम्हारी सीधी हो,
तमन्ना तुम्हारी पूर्ण हो,
सफलता पल-पल तुम्हारे कदम चूमे।
खुश नया साल!
==> झारखंड तुझे शांति मिले, भारत तुझे शांति मिले, संपूर्ण विश्व को शांति - यही हमारी कामना है।