आओ दोस्ती को परिभाषित कर जिंदगी को एक नया आयाम दें
विचार:
मानवता को मित्रता के महत्व को समझने और इसके प्रति सावधानी बरतने की आवश्यकता है। मित्र जीवन को समृद्ध या बर्बाद कर सकते हैं।
अच्छे मित्रों के साथ जीवन का आनंद लेना आवश्यक है, और इसके लिए मित्रता की परिभाषा को नए सिरे से तय करना होगा। मेरी यह कविता मित्रता के इस पहलू पर एक विचार है।
इस कविता की कुछ महत्वपूर्ण बातें :
मुझे लगता है कि यह कविता दोस्ती को नए सिरे से परिभाषित कर, जीवन को शानदार विकल्प देने और उसे तराशने में निश्चित मददगार होगी - ऐसा ही हो।
मेरा "मैं" ने मुझसे एक सवाल जो पूछा, माथा मेरा पूरा ठनका,
सवाल सुनोगे तो दंग हो जाओगे, मेरे "मैं" ने मेरे दोस्तों का लिस्ट जो मुझसे मांगा।
लिस्ट बनाने मैं जो बैठा, मेरा आत्मविश्वास थोड़ा डगमगाया,
तब मेरा पसीना खूब छूटा, जब लिस्ट बनाने दुविधा उठ बैठा।
परेशान हैरान मैंने अपने "मैं" से पूछा, यह सवाल तूने मुझसे क्यों पूछा,
वह भी एकटक मुझको देखता रह गया, मैं लिस्ट बनाने चुपचाप बैठ गया।
जान-पहचान की लिस्ट निकला कर, दोस्तों का एक लिस्ट की सोचा,
लिस्ट शानदार बन जाएगा, एक अरमान दिल में सजाया।
अब दोस्ती जांचने-परखने को, मैंने एक नज़रिया अपनाया,
इस नज़रिया से जांच परख कर, दोस्तों का एक नायाब लिस्ट सजाया।
दोस्तों की लंबी लिस्ट देखकर, खूब गुमान से मैं भराया,
अचेतन मन मेरा चेतन हुआ, जब द्वार पर मैंने मेरे "मैं" को देखा।
मैंने अपने "मैं" से पूछा बैठा, तू द्वार पर तन्हा क्यों ठहरा,
उसने तड़प दिखा कर बोला, तेरे लिस्ट में मेरा जगह भला कहां।
मैंने अपने "मैं" से बोल, तू और मैं तो एक ही भला,
तब मेरे "मैं" ने मुझसे बोला, मैं तेरा दोस्त नहीं, तो कोई तेरा दोस्त कैसे भला ।
अपने "मैं" की बातें सुनकर मैं, उसे द्वारा से खींचकर गले से लगाया,
उसे सहलाकर मैं उससे बोला, तू मेरा दोस्त नहीं, तो कौन मेरा दोस्त भला ।
सुनो मेरे भाइयों मेरे दोस्तों प्यारो, दोस्ती तो पहले अपने आप से कर लो,
जो अपने आप से दोस्ती कर लोगे, दोस्त बनाने से पहले दुश्मन पहचान लोगे ।
इस तरह से तुम अपने लिए, अच्छे-सच्चे दोस्त बना पाओगे,
अच्छे दोस्त बनाने की इस राह पे तुम, बुरी संगति से भी बचा पाओगे ।
दोस्त सारे दोस्त नहीं होते, बहुत सारे स्वार्थ सिद्धि को खड़े होते,
जब तुम अपना ही दोस्त बन जाओगे, सचमुच एक सफल इंसान कहलाओगे।
मेरे "मैं" का माकूल सवाल ने मुझे, अपने आप का सच्चा दोस्त बनाया,
दोस्तों की गलियारों में मैंने, अपने "मैं" को (जीवन को) सबसे उपर सजाया।
जब तुम अपना दोस्त बन जाओगे, अपना नजरिए तुम ठीक बदल पाओगे,
अंधापन तुम्हारी ठीक हो जाएगी, सच्चे दोस्त की अच्छी पहचान कर पाओगे।।
मां बाप में सच्चा दोस्त पाओगे, भाई बहन में तुम्हें दोस्त मिलेंगे,
पति-पत्नी में सच्चे दोस्त ढूंढ पाओगे, हर रिश्ते में दोस्ती निभा पाओगे।
खाता बही सही दोस्त बनेंगे, किताब कापी भी अच्छे दोस्त लगेंगे,
आधुनिक तकनीक को अच्छे दोस्त बनाओगे, उनके इस्तेमाल से दोस्ती से निभाओगे।
जब आधुनिक तकनीक तुम्हारे सही दोस्त बनेंगे, सोशल मीडिया ए आई नाजायज दोस्त नहीं होंगे,
जहां भी जाओगे सच्चे दोस्त पहचान पाओगे, दोस्ती को सार्थक कर पाओगे।
जब तुम अपने आप से दोस्ती निभाओगे, संपूर्ण जिंदगी सच्चे दोस्तों से घिर जाओगे,
तुम अपनी जिंदगी संवार पाओगे, जिंदगी जीने का आनंद पूरा ले पाओगे।
जब तुम अपने आप से दोस्ती निभा पाओगे, ईमानदारी से अपना कर्म करते जाओगे,
तब तुम हकीकत में देश दुनिया की खातिर, अपना पूरा योगदान जमा कर पाओगे।