Poems

मेरी रचनाओं का संकलन

राजनीति के मात्र दो पहलू - राज और नीति

विचार: मैं राजनीति का नहीं, बल्कि विज्ञान का विद्यार्थी रहा हूं। एक आम नागरिक की तरह मैं भी राजनीति को लंबे अरसों से अपने जीवन में महसूस करता आया हूं। मैं यह नहीं जानता हूं कि पॉलिटिकल साइंस में राजनीति के बारे क्या लिखा है, लेकिन एक नागरिक होने के नाते, मैं अपने ढंग से और देशवासियों के फायदे और‌ नुकसान को ध्यान में रखते हुए इस कविता में इसे परिभाषित करने का प्रयास किया है, जो वर्तमान परिस्थिति में मुझे बिल्कुल प्रासंगिक लगता है।

मेरी कविता के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • राजनीति की परिभाषा और इसके दो पहलू - राज और नीति।
  • समझदार और नासमझ लोगों के बीच का अंतर और उनके द्वारा राजनीति के उपयोग के तरीके।
  • वर्तमान राजनीति की स्थिति और इसके प्रभाव।
  • राजनीति और रणनीति के बीच का अंतर और इसके महत्व को समझने की आवश्यकता।


  • मैं समझता हूं कि मेरी यह कविता देशवासियों को जागरूक करने और उन्हें राजनीति की वास्तविकता को समझने में मदद करने के लिए एक शक्तिशाली संदेश है, जो देश की भविष्य को संवारने के लिए राजनीति के दो पहलू - राज और नीति का दर्शन जरूरी है, जो राजनीतिक सिद्धांत (उदारवाद) , मूल्य (स्वतंत्रता, समानता, और न्याय) और आदर्श (लोकतंत्र) को साकार करती है।


    जॉन अनुरंजन कुजूर
    12/09/2025

    राजनीति को समझना है, तो उसको दो फाड़ कर दो,
    उससे निकले दो महत्वपूर्ण शब्दों का, जी भर अध्ययन कर लो।

    राजनीति को दो पाड़ कर दो, तुम्हें दो शब्द मिल जाएंगे,
    एक शब्द राज होगा, दूसरा नीति मिल जाएगी,
    दोनों शब्दों को पुनः जोड़ दो, राजनीति शानदार बन जाएगी,
    राजनीति की भेद यही है, यह राज्य चलाने की क्या-खूब नीति है,
    समझने वाले समझ गये, नासमझी बेईमानी है।

    समझदारों ने राज में नीति जोड़कर, रामराज की, राजनीति चलाई है,
    नासमझ ने अपनी राजनीति कर, खुलकर साम दाम दंड भेद में डुबकी लगाई है,
    समझदारों ने दो शब्द जोड़कर खूबसूरत राजनीति सजाई है,
    नासमझ ने अपनी राजनीति कर, राजनीति बदसूरत बनाई है।

    इस तरह से,
    कुछ राजनेताओं ने, राजनीति, तो कुछ ने, राजनीति फांकी है,
    कुछ ने राजनीति सांवरा, तो कुछ ने फूंक डाली है,
    देश की बदनसीबी है यह, राजनीति देश में मैली है,
    जिधर देखा उधर ही राजनीति को, गोदी मीडिया का सहारा मिली है,
    सत्ता से सवाल पूछना छोड़ उन्होंने, राजनीति संभाली है,
    ऐसी राजनीति की यह दुर्दशा है, काठमांडू में गोदी मीडिया ने आपनी नैया डुबोई है,
    ऐसी राजनीति से देश का क्या होगा,
    जिसने जनता को नौकरी शिक्षा का झुनझुना पकड़ा कर,
    गरीबी अशिक्षा बेरोजगारी महंगाई में भिगो भिगोकर धोया है।

    अब,
    सत्ता की राजनीति करने वालों की, पहचान एकदम जरुरी है,
    देश की राजनीति को राजनीति के दो शब्दों में बदलने के लिए, लालसा की राजनीति हटाना जरूरी है,
    सत्ता पाने की रणनीति को, राजनीति से हटाना जरूरी है,
    सत्ता की रण में उन्हें, गंदी राजनीति से रोकना जरूरी है।

    स्मरण रहे,
    राजनीति तो बस, देश को बस सही दिशा देने की सटीक नीति है,
    जिसे समझकर समझदारों ने राजनीति को दो फाड़ कर, राज्य चलाने की कला अपनाई है,
    नसमझी ने राजनीति पर प्रहार कर, सत्ता की रण अपनाई है,
    देश का दुर्भाग्य यह है, राजनीति बेबस एकांत में खड़ी है।

    ऐ देशप्रेमियों ! गौर से देखो,
    राजनीति और रणनिती के सूक्ष्म भेद को समझो,
    समझो तो फायदे में होगे, न समझो तो नुकसान भोगोगे,
    इसलिए हर भ्रम से ऊपर उठकर,
    देशभर के तमाम नेताओं को, राज + नीति का गणित सिखाओ,
    ऐसा सुंदर पाठ पढ़ाकर, उन्हें अच्छा से अच्छा राजनेता बनाओ,
    समय की पुकार यही है, राजनीति की इस कला समझने और समझाने वाले जरूरी हैं।

    आज के इस दौर में, कदम कदम पर ओछी राजनीति छायी है,
    क्यों सोचते हो इस कविता में, क्या राजनीति छुपाई है,
    तो मैं तुम्हें समझता हूं,
    इस कविता को दिल से पढ़ लो, इसमें राजनीति से परे, सिर्फ तेरी-मेरी भलाई है,
    मेरी इस कविता में मैंने तुम्हें, राजनीति की वास्तविकता से रुबरु कराई है,
    मैंने अपना कर्म निभाया, अब तेरी बारी है।।

    ==> भारत तुझे शांति मिले, संपूर्ण विश्व को शांति, - यही हमारी कामना है।