Poems

मेरी रचनाओं का संकलन

सत्य पूर्ण है, और व्यक्तिगत भी

प्रस्तावना : सत्य के बारे में लोगों के विचार भिन्न हैं—कोई इसे एक 'पूर्ण सत्य' (Absolute Truth) के रूप में देखता है, तो कोई इसे 'व्यक्तिपरक' (Subjective) मानता है। मेरी यह कविता इन अलग-अलग धारणाओं के बीच एक सेतु बनाने का प्रयास है। यह सत्य के उस स्वरूप का वर्णन करती है जो स्वतंत्रता का रूपक है, और जो शानदार जीवन का एक मानक होने के साथ-साथ प्रेम और दुलार से भी भरा है। यह कविता एक मार्ग है, एक मानक है और एक जीवनशैली है, जो हमें असत्य के त्याग से लेकर सत्य के साथ आत्मिक निवास तक की यात्रा पर ले जाती है।

कविता के मुख्य बिंदु :

  • सत्य एक जीवंत व्यक्तित्व: सत्य निर्जीव विचार या 'तथ्य' नहीं है, बल्कि एक सजीव और सक्रिय महाशक्ति है। यह शक्ति तब साकार होती है जब वह मनुष्यों के व्यक्तित्व और आचरण के माध्यम से दूसरों पर प्रकट होती है। जब कोई व्यक्ति सत्य को जीता है, तो वह सत्य का 'चेहरा' बन जाता है।

  • सत्य स्वतंत्रता का आधार : सत्य के सामने ही असत्य व्यक्ति को गुलाम बनाता है—यही सत्य की स्वतंत्रता का आधार है कि वह किसी को गुलाम नहीं बनाता। सत्य की उपस्थिति उस व्यक्ति को असत्य की गुलामी का एहसास कराकर, उसे असत्य त्यागने के लिए प्रेरित करती है। इस तरह सत्य ही मुक्ति कराता है। यह कविता यह स्पष्ट करती है कि वास्तविक स्वतंत्रता सत्य को अपनाने से आती है, जो असत्य की गुलामी से परे है।

  • अप्रतिबंधित प्रेम और दुलार : सत्य धैर्यवान है; वह असत्य के गुलाम को सत्य का अहसास कराते हुए निरंतर इंतज़ार करता है। इसीलिए अक्सर समाज में यह सुनने को मिलता है कि— 'वह अब सुधर गया है'— वास्तव में यह सत्य का वही 'दुलार' और उसकी असीम करुणा है जो व्यक्ति को बदलने का अवसर देती है।

  • नैतिक मानक और जिम्मेदारी : सत्य कुछ थोपता नहीं है, वह हमें 'चुनाव' की स्वतंत्रता देता है। लेकिन अंत में, "सौ दिन का चोर" वाला मुहावरा यह याद दिलाता है कि हमारे कर्मों का हिसाब शाश्वत सत्य के सामने होना निश्चित है।

  • सत्य: कोई कठोर बंधन नहीं, बल्कि आंतरिक निवास: सत्य कोई बाहरी बोझ या कठोर बंधन नहीं है। धर्म के कर्मकांड व्यक्तिगत तौर पर तभी सिद्ध होते हैं, जब वे हृदय से सत्य के निवास में हों। अक्सर सुना जाता है— 'वह तो दोहरे मापदंड (double standards) का है'— यह तभी होता है जब सत्य हृदय में नहीं, केवल बाहरी क्रियाओं में हो। यदि हम सत्य में निवास करेंगे, तो सत्य हमारे भीतर रहकर हमारे जीवन को 'शानदार' और 'पूर्ण' बना देगा।

  • कमजोरियों का त्याग और चरित्र निर्माण: "सत्य में जीने का अर्थ है अपनी बुराइयों और कमजोरियों का त्याग। यह एक निरंतर चलने वाली 'साधना' है, जो व्यक्ति को मृत्यु के समय तक निष्पाप और पूर्ण बनाने का प्रयास करती है। जब कोई इस तरह से सत्य धारण करने का प्रयास करता है, तो सत्य उसे समाज के ज़रूरी नियमों, कानूनों और नागरिक संविधान के पालन में भी मदद करता है। विचारने वाली बात यह है कि हम नियमों का पालन कानून के डर से करते हैं या सत्य के महत्व को समझते हुए। उदाहरण के लिए, पुलिस को देख कर हेलमेट पहन लेना, और आगे बढ़ने पर उतार लेना। सत्य से जुड़ाव किसी भी इंसान को सत्य के मार्ग—अनुशासित और पवित्र जीवन की ओर ले जाता है।

  • संदेश: आइये, हम सत्य को अपने जीवन में निवास दें, अपने चरित्र का निर्माण कर एक अच्छा नागरिक बनें — ऐसा ही हो।



    जॉन अनुरंजन कुजूर
    19/12/2025

    सत्य महाशक्ति है, अपने आप में पूर्ण है,
    सत्य कभी थोपता नहीं, तुम्हारी निष्ठा पर छोड़ता है।

    कोई सत्य करे, ना करे, सत्य सब देखता है,
    टोका-टोकी नहीं करता है,
    असत्य में घिरे का, बेसब्री से इंतज़ार करता है।

    सत्य महान है, खूब बलवान है,
    सत्य को पुकार कर देखो, सदा तुम्हारे साथ है।

    सत्य गतिशील है, बहुत प्रगतिशील है,
    असत्य में फँसे व्यक्ति का, निश्चित एहसास है।

    सत्य एक राह है, असत्य के विपरीत राह है,
    जिस पर चलकर लोग, अनन्त सुख पाते हैं।

    सत्य बलिदान है, असत्य का त्याग है,
    सत्य में जीना है तो, असत्य कुर्बान है।

    सत्य शाश्वत है, और बिल्कुल निजी भी,
    दुत्कारने पर भी, उसे सबसे दुलार है।

    सत्य पूर्ण है, और व्यक्तिगत भी,
    चुनाव हमें करना है, सत्य सदा तैयार है।

    सत्य निष्ठावान है, निष्ठा उसकी गरिमा है,
    पूर्णता में जीने वाले, सत्य की पहचान हैं।

    सत्य स्वतंत्रता का रूपक है, हमें स्वतंत्र रखता है,
    असत्य के गुलाम को, सत्य ही स्वतंत्र करता है।

    सत्य निवास करता है, निवास की चाहत रखता है,
    जो सत्य में निवास करता है, सत्य उसमें निवास करता है।

    उपसंहार:
    तुम चाहो तो सत्य, या असत्य को निवास दो,
    यह तुम पर निर्भर करता है,
    लेकिन यह मत भूलना,
    सौ दिन का चोर, एक दिन पकड़ा ही जाता है।

    ==> झारखंड तुझे शांति मिले, भारत तुझे शांति मिले, संपूर्ण विश्व को शांति - यही हमारी कामना है।