Poems

मेरी रचनाओं का संकलन

प्रत्येक मां प्रत्येक नारी सम्मान हमारा कर्तव्य

विचार: हर मां का सम्मान जरुरी है, प्रत्येक मां का महत्व बराबर है। मां, मां है, चाहे वह गरीब की मां हो, अमीर की मां हो, आम जनता की मां हो या फिर मोदी साहब की मां, स्वार्गिक हो या जीवित हो। क्या कोई बिना मां के पैदा हो सकता है? हर मां का प्रसव पीड़ा बराबर है, वह उसे झेलती है, इंसानियत को जीवन देने के लिए। हम सब के सब इंसानियत की खातिर पैदा हुए हैं, गाली गलौज और कदाचार के लिए कतई नहीं!! मोदी जी के मां को गाली-गलौज करने वाले ने सिर्फ उनकी स्व० मां को ही नहीं , बल्कि अपनी और सृष्टि के आरंभ से तमाम माताओं-बहनों का अपमान किया है। कारण, मां शब्द एक ही है और मां का उपयोग सुपुत्र-सुपुत्री जनने के लिए है।

मोदी साहब की स्व० मां को गाली देने वाला वह नौजवान भी अपनी मां के लिए "मां की गाली" बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। उसको मेंटरिंग की जरूरत है, समझाने की जरूरत है। हर गाली के पीछे क्या स्टेट बंद किया जा सकता है? तो फिर बिहार बंद क्यों किया गया? क्या हासिल हुआ? यदि यह राजनीति है, तो यह भी मां का अपमान है!!

चलिए, हम जहां भी हैं, सब मिलकर प्रत्येक नारी का सम्मान सुनिश्चित करे, यही हम प्रत्येक जन जो मां से उत्पन्न हैं, का परम कर्तव्य है - ऐसा ही हो।


जॉन अनुरंजन कुजूर
05/09/2025

कामदार ने अपनी माँ की अपमान पर, सबक सिखाने की ठानी है,
दरभंगा में किसी आवारे की गाली पर, पांच दिन बाद खिस दिखाई है,
उनकी एक आवाज पर भाजपाई, बिहार की सड़क पर आई है,
महिला सम्मान की आड़ में, महिलाएं भी अनावश्यक सड़क पर बौखलाई हैं।

पांच घंटे की बंद बुला कर, ऐसा तांडव मचाई है,
जन-जन के बीच में, खूब फजीहत कराई है,
सारा संयम त्याग कर उन्होंने, सड़क जाम कराई है,
सौहार्द की भाषा छोड़कर, अपमान पर उतर आई है,
माँ सम्मान में निकली टोली, कामदार का बेहद अपमान कराई है।

विद्यालय जाने निकली शिक्षिका से, धक्का मुक्की पर उतरआई है,
कैदी-सा उनसे व्यवहार करते हुए, उनका अपमान कराई है,
लक्ष्मी बाई-सा तेवर ओढ़े, खूब फजियत करवाई है,
खूब लड़ी प्रधान सेवक की टोली, खूब महिला-सम्मान गवांई है।

प्रसव पीड़ा से कराह रही मां की, एम्बुलेंस रुकवयी है,
उनके प्रसव के दिन को, अजीब-सा चैलेंज देती है,
गलत-सलत व्यांबाजी कर, महिला सम्मान लुटाई हैं,
खूब लड़ी प्रधान सेवक की टोली, खूब महिला-सम्मान गवांई है।

नौकरी की परीक्षा देने जा रही बाप-बेटी के रास्ते, आफत बनकरआई है,
मानो जैसे पहाड़ धस कर, हठात रास्ता बाधित कराई है,
बरसों-बरसों की बच्ची के मेहनत पर, अचानक आफत बरपाई है,
खूब लड़ी प्रधान सेवक की टोली, खूब महिला-सम्मान गवांई है।

कहीं जरूरी काम से जा रहे भाई साहब को, बाईक से धक्का दे उतारी है,
महिला सम्मान की खातिर उनको, उनकी पत्नी के सामने धुनाई है,
पति की खुल्ले बेइज्जती देख, पत्नी बहुत घबराई है,
प्रधान सेवक की मां की सेवा में, खूब फजीहत करवाई है।

एक बुढ़े भाई साहब को साइकल से, धक्का दे गिराई है,
बेचारे किसी तरह संभाल कर, उनसे गुहार लगाई है,
असहाय बुढ़े भाई साहब के सामने इन्होंने, खूब मर्दानगी दिखाई है,
खूब लड़ी प्रधान सेवक की टोली, कामगार का खेल बिगड़ी है।

हार्ट पेशेंट ने जब टायर ना जलाने की, इनसे गुहार लगाई है,
अपना शौर्य-साहस दिखाकर, उनसे मारपीट कर टायर जलाई है,
पेशेंट के परिवार वालों ने, अपना चोट मीडिया को दिखाई है,
खूब लड़ी प्रधान सेवक की टोली, प्रधान सेवक का खेल बिगड़ी है।

छोटे-छोटे बच्चों को, स्कूल जाने से रोका है,
रोज कमा-खाने वाले कामगारों को, काम पर जाने से रोका है,
पुलिस की गाड़ी रोक कर, पुलिस को भी हड़काया है,
जनता के बीच गाली-गलौज कर, पूरा माहौल बिगड़ा है,
इस डबल इंजन की सरकार ने, एक ऐसा यूनिक बंद बुलाया है,
गाली का जवाब गाली से दे कर, पार्टी का झंडा झुकाया है,
माँ सम्मान में निकली टोली, कामदार का नाक कटाई है।

चार सितंबर दो हजार पच्चीस का यह दिन, कैसे बिहार भूल पाएगी,
नफ़रत के बदले नफ़रत का पैगाम, कैसे बिहार भूल पाएगी,
एक आवारे की गाली के बदले गुंडागर्दी, कैसे बिहार भूल पाएगी,
सोच समझकर प्रधान सेवक को, कोई भी कदम उठाना है,
एक आवारे की गाली पर, इतना हंगामा ना मचाना है।

आप ही सोचिए!! हर मां का सम्मान जरुरी है, प्रत्येक मां का महत्व बराबर है। मेरी बातों से राजनीति करने वाले शायद सहमत ना हों, पर आप समझेंगे, पूर्ण भरोसा है क्योंकि हम और आप सब लोगों को शांति सौहार्द भाईचारा चाहिए। माता बहनों का सम्मान चाहिए।

==> भारत तुझे शांति मिले, संपूर्ण विश्व को शांति, - यही हमारी कामना है।