Poems

मेरी रचनाओं का संकलन

परखना ज़रूरी है

प्रस्तावना : यह कविता आज के दौर की एक प्रासंगिक रचना है, जो समाज में व्याप्त समस्याओं को उजागर करती है और उन पर गहराई से विचार करने के लिए प्रेरित करती है। यह सीधे पाठकों से जुड़कर इन मुद्दों के समाधान पर सोचने का प्रयास करती है, क्योंकि मिलावट की यह समस्या आज हर नागरिक के लिए प्रासंगिक है।

इस कविता की कुछ महत्वपूर्ण बातें :

  • आर्थिक लालच और नैतिक पतन : कविता दिखाती है कि कैसे पैसे कमाने की होड़ में इंसानियत पीछे छूट जाती है, और मिलावट जैसे अनैतिक कार्य समाज में भ्रष्टाचार और अविश्वास को जन्म देते हैं।

  • उपभोक्तावाद और सस्ते की चाहत : यह रचना उपभोक्तावाद की उस मानसिकता पर प्रकाश डालती है, जहाँ लोग कम कीमत के लालच में गुणवत्ता और सुरक्षा से समझौता करते हैं। यह मानसिकता मिलावटखोरों को पनपने का मौका देती है, और अंततः उपभोक्ता स्वयं धोखे का शिकार बन जाता है।

  • मिलावट का व्यापक विस्तार: कविता का दायरा सिर्फ कुछ वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दवा, दारू, दूध, मिठाई और यहाँ तक कि सोना-चाँदी जैसी चीजों में भी मिलावट की बात करती है। यह समाज में विश्वास के गहरे संकट को दर्शाती है।

  • सरकारी तंत्र की निष्क्रियता: कविता सरकारी एजेंसियों की कथित निष्क्रियता और भ्रष्टता पर सवाल उठाती है। यह व्यवस्था के प्रति निराशा और अविश्वास को जन्म देती है, क्योंकि कानून का डर न होने से मिलावटखोर बेखौफ होकर अपना काम करते रहते हैं।

  • वैचारिक और शैक्षिक मिलावट: यह कविता एक गहरा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है कि मिलावट सिर्फ भौतिक वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की सोच, इतिहास और शिक्षा को भी दूषित कर सकती है। यह युवाओं को गुमराह करके भविष्य में एक वैचारिक रूप से कमजोर समाज का निर्माण कर सकती है।

  • संदेश: कविता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश जीवन में व्यक्तिगत विवेक और जागरूकता का महत्व है। यह स्पष्ट करती है कि समस्याओं का समाधान केवल सरकार या कानून पर निर्भर नहीं करता, बल्कि एक बेहतर, मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ समाज के लिए हर नागरिक को अपने विवेक के बल पर सशक्त होना होगा - ऐसा ही हो।



    जॉन अनुरंजन कुजूर
    14/10/2025

    पैसों की भूख ने, इंसानियत निगला,
    उसके प्यार में, इंसानियत दफनाया।
    सस्ता पाना इंसान की इच्छा,
    पर सस्ता के चक्कर में धोखा भी खाया।

    हर सस्ता बुरा नहीं होता,
    पर सस्ते में बुरा भी हो सकता।
    संभल संभल कर खरीदारी करना,
    सस्ते के चक्कर में मिलावट से बचाना।

    नकली सामान बाजार गरमाया,
    मन ही मन इंसान भरमाया,
    अच्छा बुरा में भेद ना कर पाया,
    अपने हाथों मौत उठा लाया।

    नकली दवा, जान पर बन आया,
    मिलावटी दारू, बहू बेटियों का घर उजाड़ा।
    नकली दूध, बच्चा बीमार कर डाला,
    मिलावटी मिठाई, आफत बरपाया।

    सस्ता ही सिर्फ नकली नहीं होता,
    महंगा में भी नकली पाया जाता है।
    जांच परखकर खरीदारी करना,
    नकली लाकर आफ़त न मोल लेना।

    सोना भी नकली हो सकता है,
    चांदी में भी मिलावट हो सकती है।
    मेवा छुहारे गरम मसाले,
    नकली हुए तो आफत हैं सारे।

    पता नहीं चलता सरकार क्या करती,
    पुलिस प्रशासन सोई जान पड़ती।
    कभी कभार छापा पड़ जाता,
    धंधा नकली धड़ल्ले चलता रहता।

    मिलावट कहां नहीं है,
    मिलावटी का जहां यही है।
    एनसीईआरटी का अध्याय बदला,
    मूल शिक्षा का स्तर घटाया।

    गांधी जी का अध्याय हटाया,
    बाबरी मस्जिद का नाम बदल डाला ।
    डार्विन का थ्योरी हटाया,
    आउटडेटेड कोर्स बहाने वैचारिक मिलावट पर उतर आया।

    मिलावट सिर्फ भौतिक ही नहीं,
    मिलावट वैचारिक भी होती है।
    मिलावट से बच सको तो बच लो,
    यह बड़ी घातक सिद्ध होती है।

    जैसा मिला वैसे ही मत उठाओ,
    थोड़ा अपना दिमाग लगाओ।
    जांच-परख कर कदम बढ़ाओ,
    सच-झूठ का पता तुम लगाओ।

    उपसंहार:

    उठो जागो अब तुम ही पहचानो,
    असली-नकली का भेद तुम जानो।
    जो नकली तुम भाँप पाओगे,
    जीवन शानदार जी पाओगे।

    ==> झारखंड तुझे शांति मिले,, भारत तुझे शांति मिले, संपूर्ण विश्व को शांति - यही हमारी कामना है।