दीपावली का एक अद्वितीय दीया
प्रस्तावना : मेरी यह कविता एक प्रेरणादायक रचना है। यह दीपावली के भौतिक पक्ष से शुरू होकर उसके गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक अर्थ तक जाती है।
यह कविता हमें याद दिलाती है कि सच्ची रोशनी दीयों की कतार में नहीं, बल्कि हमारे अपने हृदय में होती है, और यह आंतरिक प्रकाश ही है जो हमारे जीवन और समाज को वास्तव में रोशन कर सकता है।
इस कविता की कुछ महत्वपूर्ण बातें :
संदेश: हम उस एक अद्वितीय दीया को रोशन करें, जो खुद को साथ-साथ औरों को भी रौशन करें - ऐसा ही हो।
दीपावली की गोष्टी में, उत्सुकता में चर्चा में,
आनंद की बहार में, गुलजारी माहौल में।
दीपावली के चर्चे, जितनी उम्र उतने ही किस्से,
गिनाए दीयों की कतार, सुनाए दीयों के नमूने हजार।
चर्चा में यह सामने आया, दीयों से जगत जगमगाया,
पर एक दीया उन लाखों में अनोखा, जो जलाए, उसका मन जगमगाया।
जलाते हैं दीये, करते जगत रौशन,
तलाशों उन लाखों में एक, करने अपने मन रौशन।
जो तुम ढूंढ पाओगे, लाखों में एक दीया अनोखा,
जगत जीवन दोनों रौशन, रोशनी की असल सुकून पाओगे।
मन का अंधेरा जो तुम मिटा पाओगे, जगत दीया तुम बन जाओगे,
लोग तुझे तलाशेंगे, तुम लाखों के मन का दीया जला पाओगे।
इस दीपावली दिल का दीया जलाओ, ना बुझने वाली अद्वितीय दीया जलाओ,
लाखों दीयों से जगत रौशन है, एक दीये से लाखों दिल रौशन है।