Poems

मेरी रचनाओं का संकलन

दीपावली का एक अद्वितीय दीया

प्रस्तावना : मेरी यह कविता एक प्रेरणादायक रचना है। यह दीपावली के भौतिक पक्ष से शुरू होकर उसके गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक अर्थ तक जाती है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि सच्ची रोशनी दीयों की कतार में नहीं, बल्कि हमारे अपने हृदय में होती है, और यह आंतरिक प्रकाश ही है जो हमारे जीवन और समाज को वास्तव में रोशन कर सकता है।

इस कविता की कुछ महत्वपूर्ण बातें :

  • आध्यात्मिक संदेश: दीपावली केवल भौतिक दीयों का त्योहार नहीं है, बल्कि आत्म-ज्ञान, आंतरिक शांति और सकारात्मकता का त्योहार है।

  • सामाजिक संदेश: एक व्यक्ति का शुद्ध और प्रकाशित मन लाखों लोगों को प्रेरित कर सकता है। जब हम खुद को सुधारते हैं, तो समाज में भी सकारात्मक बदलाव लाते हैं।

  • कलात्मक विशेषताएँ: कविता में सरल, सुलभ और प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग किया गया है, जिसमें 'दीया' और 'रोशनी' जैसी भौतिक वस्तुएँ आध्यात्मिक प्रेरणा का प्रतीक बन जाती हैं।


  • संदेश: हम उस एक अद्वितीय दीया को रोशन करें, जो खुद को साथ-साथ औरों को भी रौशन करें - ऐसा ही हो।



    जॉन अनुरंजन कुजूर
    20/10/2025

    दीपावली की गोष्टी में, उत्सुकता में चर्चा में,
    आनंद की बहार में, गुलजारी माहौल में।

    दीपावली के चर्चे, जितनी उम्र उतने ही किस्से,
    गिनाए दीयों की कतार, सुनाए दीयों के नमूने हजार।

    चर्चा में यह सामने आया, दीयों से जगत जगमगाया,
    पर एक दीया उन लाखों में अनोखा, जो जलाए, उसका मन जगमगाया।

    जलाते हैं दीये, करते जगत रौशन,
    तलाशों उन लाखों में एक, करने अपने मन रौशन।

    जो तुम ढूंढ पाओगे, लाखों में एक दीया अनोखा,
    जगत जीवन दोनों रौशन, रोशनी की असल सुकून पाओगे।

    मन का अंधेरा जो तुम मिटा पाओगे, जगत दीया तुम बन जाओगे,
    लोग तुझे तलाशेंगे, तुम लाखों के मन का दीया जला पाओगे।

    इस दीपावली दिल का दीया जलाओ, ना बुझने वाली अद्वितीय दीया जलाओ,
    लाखों दीयों से जगत रौशन है, एक दीये से लाखों दिल रौशन है।

    ==> झारखंड तुझे शांति मिले, भारत तुझे शांति मिले, संपूर्ण विश्व को शांति - यही हमारी कामना है।