विचारधारा की पड़ताल
सारांश: मेरी यह रचना देश में एकता और सौहार्द की आवश्यकता पर जोर देता है। मैं समझता हूं कि विचारधारा की पड़तालऔर सही राह पकड़ने की बात आज की परिस्थितियों में बिल्कुल ही प्रासंगिक है । मेरी कविता की धुरियां इस प्रकार है :
नफरत की विचारधारा से ऊपर उठाना देशहित में निहायत ही जरूरी है। हम अपनी विचारधारा में सकारात्मक परिवर्तन कर देश लाजवाब बनाएं।
देश एक, विचारधारा अनेक,
सुनने में खुबसूरत लगती है।
तुम किस विचारधारा से प्रेरित हो, तुम किस विचारधारा से प्रभावित हो,
यह समझना जरूरी है।
जान लो, यह हो नहीं सकता, दो नाव पर कोई एक साथ सवार हो नहीं सकता।
सोचो, तुम किस विचारधारा से सहमत हो ?
क्या तुम इधर भी और उधर भी हो ?
विचार कर लो, अपनी विचारधारा की पड़ताल कर लो,
फिलहाल देश की पुकार यही है,
तुम सही विचारधारा की राह पकड़ लो।
कुछ नेताओं ने अपने स्वार्थ की खातिर,
एक ऐसी विचारधारा चलाई है, जो अच्छे और बुरे के मिश्रण का, एक कड़वी सच्चाई है ।
इस मिश्रित विचारधारा ने अच्छे-अच्छों को गुमहराह कर अंधभक्त बनाई है।
उनसे भगवान् का नाम लेवाकर, दंगा-फसाद कराईं है,
उन्हें धर्म की आड़ में बैठाकर, खूब नफरत फैलाई है,
और दूसरों के पूजन स्थल में अपना झंडा फहराई है।
यह एक ऐसी विचारधारा है,
जो अधर्म को धर्म बतलाती है,
धर्म की आड़ में गुंडागर्दी कर, प्रजातंत्र की जगह राजतंत्र चलाती है।
उठो देशवासियो, अब समय है, अधर्म की विचारधारा पहचान लो,
सौहार्द की धारा में बहकर, एकता का निर्माण करो।
आओ हम सब मिलकर एक नई दिशा में चल-चलें,
जहां कदाचार मुक्त, रामराज हो,
और प्रेम दया क्षमा शांति करुणा, अपनी सरोकार, और आने वाली पीढ़ी की शानदार विरासत हो।