Poems

मेरी रचनाओं का संकलन

मेरा वोट मेरा भविष्य

विचार: यह कविता राजनीतिक व्यवस्था और नेताओं के चरित्र पर एक सशक्त व्यंग्य है, जो सत्ता में आने से पहले और बाद के उनके व्यवहार में आए बदलाव को उजागर करती है। यह आम नागरिक के उस दर्द और निराशा को आवाज देती है, जो बार-बार चुनावी वादों पर भरोसा करने के बाद पैदा होता है। साथ-ही-साथ यह कविता जनता को अपने वोट के सही इस्तेमाल के लिए प्रेरित करती है।

इस कविता की कुछ महत्वपूर्ण बातें :

  • सार्वजनिक हित का मुद्दा: यह कविता किसी व्यक्तिगत झगड़े या निजी आरोपों के बारे में नहीं है। यह व्यापक सार्वजनिक मुद्दों पर टिप्पणी करती है जैसे कि नेताओं का पांच साल तक गायब हो जाना, झूठे वादे, और जनता का मोहभंग, जो सार्वजनिक हित के विषय हैं और इन पर खुलकर चर्चा करना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।


  • सामान्य आलोचना: यह कविता राजनीतिक नेताओं के सामान्य चरित्र और व्यवहार पर प्रकाश डालती है और जनता को जागरूक करती है।


  • राय और व्यंग्य: कविता में व्यक्त की गई भावनाएं मेरी राय और व्यंग्य हैं। ये बातें कठोर आलोचना हो सकती हैं, लेकिन ये मेरी सच्ची भावनाएं हैं और इन्हें व्यक्त करने का उद्देश्य जनता को उनके एक वोट पर अगले पांच साल के संदर्भ पर जागरूक करना है।


  • सद्भावना कविता का समग्र संदेश जनता को जागरूक करना और बेहतर चुनाव करने के लिए प्रेरित करना है।


  • संदेश: आप नेता चुन कर अपना भविष्य संवारते हो या बिगाड़ते हो, आपकी सूझ-बूझ पर है - ऐसा ही हो।



    जॉन अनुरंजन कुजूर
    11/10/2025

    तुम ही मेरे नेता हो, तुम ही मेरे विजेता हो,
    तुम ही मेरे एक वोट की, आवाज़ और उम्मीद हो,
    नेता की वर्दी में तुम, मेरे हितकारी हीरो हो,
    तुम्हारे हर नारा, हमारे कर्णो को बेहद प्यारे हैं,
    तुम्हारे भाषण अंश दर अंश, हमने अपने मन में सवांरे हैं,
    दिल जीत कर तुम, हमारे ख्वाबों के चरितार्थ हो।

    अब पांच साल बाद :
    अचानक तुम फिर आज कैसे, अपने अस्तित्व का इजहार हो,
    इतने लंबे अर्से तक तुम, अपनी ही खामोशी के शिकार हो,
    हमें जस-के-तस छोड़ तुम, सत्ता की गलियारों में मदहोश हो,
    नेता की वर्दी में तुम, फिर से मासूमियत के इजहार हो,
    नारा लगा कर तुम, इतने लंबे अर्से तक फरार हो,
    तुम्हारे भाषण बाजी हमारे, भस्म की कसम है,
    दिल तोड़ने के तुम, शातिराना दिमाग हो।

    तुम बकते बहुत हो, करते शायद ही कुछ मेरे फेबर में हो,
    तुम वादाओं के पुलिंदा ही नहीं, तुम वादा खिलाफी के नमूने हो,
    जुमलेबाजी के तुम बाजीगर ही नहीं, तुम अचूक शिकारी भी हो,
    आंखों में झोंकने के तुम धूल ही नहीं, तुम आंखों का तिनका भी हो,
    वाकपटुता में तुम अव्वल ही नहीं, तुम शानदार हवाबाज़ भी हो,
    बात घुमाने की अदा के तुम कलाकार ही नहीं, तुम चक्रवर्ती तूफान भी हो,
    सुनने के कतई तुम आदि नहीं, सुनाने में तुम महा-माहिर हो,
    अब तुम ही बताओ:
    पांच साल बाद कैसे तुम, हमें अपना वसीयत समझते हो??

    इसलिए:
    उठो जागो, अपने वोट का मूल्य पहचानो,
    हर प्रत्याशी का, रिकॉर्ड खंगालो,
    यदि पिछले पांच साल पछताए हो,
    तो फिर आगे के लिए सतर्क हो जाओ,
    किसी के बहकावे में मत आओ,
    अपने वोट का सही इस्तेमाल कर,
    अपनी जिंदगी के पांच बहुमूल्य साल संवारो।

    विद्यालय में मैंने पढ़ा और सीखा है:
    शिकारी आएगा, जल बिछाएगा, तुम उसके जाल में मत फंसना।
    इसलिए आप से एक छोटा निवेदन है,
    आप भावना में मत बहाना, सिर्फ अपनी बुद्धिमता और विवेक का उपयोग करना।
    ऐसा ही हो, ऐसा ही हो, ऐसा ही हो।

    ==> झारखंड तुझे शांति मिले,, भारत तुझे शांति मिले, संपूर्ण विश्व को शांति - यही हमारी कामना है।