मेरा वोट मेरा भविष्य
विचार: यह कविता राजनीतिक व्यवस्था और नेताओं के चरित्र पर एक सशक्त व्यंग्य है, जो सत्ता में आने से पहले और बाद के उनके व्यवहार में आए बदलाव को उजागर करती है।
यह आम नागरिक के उस दर्द और निराशा को आवाज देती है, जो बार-बार चुनावी वादों पर भरोसा करने के बाद पैदा होता है।
साथ-ही-साथ यह कविता जनता को अपने वोट के सही इस्तेमाल के लिए प्रेरित करती है।
इस कविता की कुछ महत्वपूर्ण बातें :
संदेश: आप नेता चुन कर अपना भविष्य संवारते हो या बिगाड़ते हो, आपकी सूझ-बूझ पर है - ऐसा ही हो।
तुम ही मेरे नेता हो, तुम ही मेरे विजेता हो,
तुम ही मेरे एक वोट की, आवाज़ और उम्मीद हो,
नेता की वर्दी में तुम, मेरे हितकारी हीरो हो,
तुम्हारे हर नारा, हमारे कर्णो को बेहद प्यारे हैं,
तुम्हारे भाषण अंश दर अंश, हमने अपने मन में सवांरे हैं,
दिल जीत कर तुम, हमारे ख्वाबों के चरितार्थ हो।
अब पांच साल बाद :
अचानक तुम फिर आज कैसे, अपने अस्तित्व का इजहार हो,
इतने लंबे अर्से तक तुम, अपनी ही खामोशी के शिकार हो,
हमें जस-के-तस छोड़ तुम, सत्ता की गलियारों में मदहोश हो,
नेता की वर्दी में तुम, फिर से मासूमियत के इजहार हो,
नारा लगा कर तुम, इतने लंबे अर्से तक फरार हो,
तुम्हारे भाषण बाजी हमारे, भस्म की कसम है,
दिल तोड़ने के तुम, शातिराना दिमाग हो।
तुम बकते बहुत हो, करते शायद ही कुछ मेरे फेबर में हो,
तुम वादाओं के पुलिंदा ही नहीं, तुम वादा खिलाफी के नमूने हो,
जुमलेबाजी के तुम बाजीगर ही नहीं, तुम अचूक शिकारी भी हो,
आंखों में झोंकने के तुम धूल ही नहीं, तुम आंखों का तिनका भी हो,
वाकपटुता में तुम अव्वल ही नहीं, तुम शानदार हवाबाज़ भी हो,
बात घुमाने की अदा के तुम कलाकार ही नहीं, तुम चक्रवर्ती तूफान भी हो,
सुनने के कतई तुम आदि नहीं, सुनाने में तुम महा-माहिर हो,
अब तुम ही बताओ:
पांच साल बाद कैसे तुम, हमें अपना वसीयत समझते हो??
इसलिए:
उठो जागो, अपने वोट का मूल्य पहचानो,
हर प्रत्याशी का, रिकॉर्ड खंगालो,
यदि पिछले पांच साल पछताए हो,
तो फिर आगे के लिए सतर्क हो जाओ,
किसी के बहकावे में मत आओ,
अपने वोट का सही इस्तेमाल कर,
अपनी जिंदगी के पांच बहुमूल्य साल संवारो।
विद्यालय में मैंने पढ़ा और सीखा है:
शिकारी आएगा, जल बिछाएगा, तुम उसके जाल में मत फंसना।
इसलिए आप से एक छोटा निवेदन है,
आप भावना में मत बहाना, सिर्फ अपनी बुद्धिमता और विवेक का उपयोग करना।
ऐसा ही हो, ऐसा ही हो, ऐसा ही हो।