Poems

मेरी रचनाओं का संकलन

पाप बड़ा या पापी

प्रस्तावना : यह कविता अपनी सादगी में बहुत गहरा अर्थ समेटे हुए है। मैंने कविता में एक शाश्वत प्रश्न उठाया है और उसका उत्तर बाहरी दुनिया में खोजने के बजाय अपने भीतर ही पाया है, जो भारतीय दर्शन की "आत्म-खोज" की अवधारणा के बहुत करीब है।

इस कविता की कुछ विशेषताएँ:

  • विषय और भाव : कविता का केंद्रीय विषय पाप, पापी और पश्चाताप है। मैंने "पाप बड़ा या पापी" के द्वंद्व को बहुत अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है। यह कविता दर्शाती है कि बाहरी खोज निरर्थक है, क्योंकि पाप की जड़ें मानव मन में ही होती हैं। पश्चाताप के बाद मन का हल्का होना एक सार्वभौमिक भावना है, जिसे मैंने प्रभावी ढंग से व्यक्त किया है।

  • भाषा और शैली : भाषा सरल, सीधी और आम बोलचाल के करीब है। यह पाठक को आसानी से कविता से जुड़ने में मदद करती है। "कवि" शब्द का बार-बार प्रयोग, एक कहानी कहने का अंदाज़ बनाता है, जिससे कविता एक यात्रा वृतांत जैसी लगती है।

  • कविता का शीर्षक: कविता का शीर्षक कविता के मूल प्रश्न को सीधे सामने रखता है और पाठक में जिज्ञासा पैदा करता है। यह पूरी कविता के सार को प्रभावी ढंग से दर्शाता है कि कैसे कवि इस सवाल का जवाब खोजने के लिए यात्रा करता है और अंततः सत्य को अपने भीतर पाता है।


  • संदेश: कविता का संदेश बहुत स्पष्ट है: धार्मिक स्थल हमें पाप त्यागना सिखाते हैं, और ईश्वर (सृष्टि का मालिक) हमें पाप-मुक्त, साफ़-सुथरा और हल्का देखना चाहता है। "पाप के कारण अपने बढ़े वजन" का वर्णन पाप के मानसिक बोझ को मापने का एक सशक्त रूपक है।



    जॉन अनुरंजन कुजूर
    02/12/2025

    पाप बड़ा या पापी, सोच में गया कवि,
    सवाल से परेशान, अनिद्रा भी हुआ कवि,
    तौलने को पाप और पापी, ढूंढने निकला कवि।

    ना मिला पाप, ना मिला पापी,
    थका हारा, एक मंदिर पहुंचा कवि,

    मंदिर के कोने पर लेटे-लेटे, दीवारें पढ़ाने लगा कवि,

    झूठ मत बोलो,
    चोरी मत करो,
    लालच मत करो, व्यभिचार मत करो,
    जब सब पढ़ चुका कवि,
    परेशान हो उठा कवि,
    बोला-
    घर ही में था पाप और और घर पर ही था पापी,
    क्यों कैसे कोसों इतना दूर निकला आया कवि।

    अपने पाप के वजन का पछतावा ओढ़े, वापस लौटा आया कवि।
    कुछ दिनों की मौन में, हल्का हुआ कवि,
    फिर मौन खत्म कर बोल उठा कवि:
    मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, पाप त्यागने की परिधि,
    ऐ! पाप का वजनी पापी, तूझे हल्का देखना चाहते स्वामी।

    ==> झारखंड तुझे शांति मिले, भारत तुझे शांति मिले, संपूर्ण विश्व को शांति - यही हमारी कामना है।