Poems

मेरी रचनाओं का संकलन

घृणा के सही पात्र पहचानो

प्रस्तावना : यह घृणा जैसे एक जटिल और संवेदनशील विषय को एक दार्शनिक, सामाजिक और व्यक्तिगत दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। यह केवल समस्या को नहीं दर्शाती, बल्कि उसका समाधान भी सुझाती है। यह पाठकों को गहराई से सोचने और आत्म-मंथन करने के लिए प्रेरित करती है। कविता अपने गहरे अर्थ और सामाजिक महत्व के कारण वर्तमान में बहुत प्रासंगिक है।

इस कविता की कुछ महत्वपूर्ण बातें :

  • मूल विचार: कविता एक मौलिक और विचारोत्तेजक विचार प्रस्तुत करती है, जो पाठकों को घृणा के बारे में अपने विचारों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करती है।
  • दार्शनिक गहराई: यह केवल घृणा पर टिप्पणी नहीं है, बल्कि आत्म-मंथन और नैतिक जिम्मेदारी पर एक गहरा चिंतन है।
  • रूपक और प्रतीक: 'गांधी का चश्मा' और 'स्वच्छ भारत अभियान' जैसे प्रतीकों का उपयोग कविता के संदेश को प्रभावी और रचनात्मक तरीके से व्यक्त करता है।
  • सुसंगतता: कविता के विभिन्न भाग एक तार्किक और सुसंगत संदेश देने के लिए एक साथ आते हैं, जो इसे एक पूर्ण और संतोषजनक अनुभव बनाते हैं।

    संदेश: घृणा जरूरी है। यह एक औजार है जिसके माध्यम से इंसान अपने आंतरिक कमजोरियों से घृणा कर अपने आप को घृणा से परे कर सकता है - ऐसा ही हो।



    जॉन अनुरंजन कुजूर
    17/10/2025
  • घृणा करना और रोकना, दोनों जरूरी है,
    घृणा के सही पात्र पहचानना, जरूरी है,
    घृणा को सही समझने के लिए, घृणा की शिक्षा जरूरी है।

    घृणा भ्रम फैलाती है,
    घृणा के दो पात्रों को आपस में, लड़ाती है,
    घृणा करने और सहने वाले पात्रों की मानसिकता का, उपचार भी जरूरी है।

    फिर भी घृणा जरूरी है,
    कब कहां कैसे क्यों करना, यह समझना जरूरी है,
    घृणा से बचना है, तो घृणा की शिक्षा निहायत जरूरी है।

    घृणा की मनाही नहीं,
    पर शिक्षा बिन घृणा, बेवकूफी है,
    घृणा करने के लिए, घृणा का नशा उतारना जरूरी है।

    घृणा शिक्षा लेनी है तो,
    गांधी के चश्मे से देखना, जरूरी है,
    उनके चश्मे के फोकल प्वाइंट को समझना, जरूरी है।

    घृणा से निपटना है तो,
    स्वच्छ भारत अभियान में सम्मिलित होना, जरूरी है,
    जहां बाहरी से ज्यादा, मानसिक गंदगी हटाना जरूरी है।

    उपसंहार:

    घृणा की मनाही नहीं है,
    अपने पापों और कुकर्मों से घृणा करना, जरूरी है,
    दूसरों से घृणा से पहले, अपने नाजायज हरकतों (घृणा के पात्र) से घृणा जरूरी है।

    ==> झारखंड तुझे शांति मिले, भारत तुझे शांति मिले, संपूर्ण विश्व को शांति - यही हमारी कामना है।