Poems

मेरी रचनाओं का संकलन

मां की नाकाम दुवा

सारांश: इस कविता के माध्यम से मैंने पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक असहजता एवं कठिनाइयों को दर्शाने का प्रयास किया है। साथ ही साथ सरकार को देशवासियों के करोड़ों करोड़ परिवारों की बिखरती हुई आर्थिक स्थिति से अवगत कर उन्हें जगाने की उत्सुकता है। इस कविता की विशेषताएं हैं:

  • पारिवारिक भावनात्मक अभिव्यक्ति
  • सामाजिक मुद्दे
  • सरकार की जवाबदेही

  • बेरोजगारी, युवाओं की समस्याओं और सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार इत्यादि सरकार की वादाखिलाफी, रोजगार के प्रति निष्क्रियता का नतीजा है।


    जॉन अनुरंजन कुजूर
    04/09/2025

    माँ परेशान है, उनकी दुआ भी नाकाम है,
    बेटा इम्तिहान देता है, पर बार-बार नाकाम है,
    पूछने पर वह कहता है, मैं क्या करूं जब इम्तिहान ही रद्द, स्थगित वा विलंब हो जाता है।

    माँ परेशान है, उनकी दुआ भी नाकाम है,
    अपने बेटे की परेशानी देख, पूछती है आगे कोई और इम्तिहान है,
    उत्तर मिलता है, इम्तिहान तो है, लेकिन सिर्फ फॉर्म भरने में पैसा बह जाता है।

    माँ परेशान है, उनकी दुआ भी नाकाम है,
    पूछती है बेटे और कब होगी तेरी इम्तिहान,
    उत्तर मिलता है, पहले के इम्तिहान के धरना खत्म होने का इंतजार है,
    और इम्तिहान देकर धरना ही धरना करना बेकार है।

    माँ परेशान है, उनकी दुआ भी नाकाम है,
    कहती है बेटे से, क्यों नहीं बैठते पढ़ने?
    उत्तर मिलता है, जब धरना में ही बैठना है, तो आगे क्यों पढ़ना है?

    माँ परेशान है, उनकी दुआ भी नाकाम है,
    बेटा को समय बिताते देख, पूछती है, कब तू आदमी बनेगा रे!
    सुन कर बेटा चुपचाप है, अंदर की घुटन से मानसिक तनाव है।

    माँ परेशान है, उनकी दुआ भी नाकाम है,
    बेटा है तो पूछेगी ही, आगे का क्या इरादा है?
    बेटा अंगुली में गिन कर बोला, और दो-चार साल है।

    माँ परेशान है, उनकी दुआ भी नाकाम है,
    मां के बार-बार पूछने से,
    बेटा भी परेशान है,
    सबेरे ही निकल जाता है,
    देर रात लौट आता है,
    मूंछ दाढ़ी बढ़ा कर बुड्ढा नजर आता है।

    माँ परेशान है, उनकी दुआ भी नाकाम है,
    पूछने पर कुछ नहीं बोलाता,
    बस सर हिला कर मुंह मोड़ लेता,
    नशा कर जो वापस लौटता, घर सिर पर उठा लेता।

    माँ परेशान है, उनकी दुआ भी नाकाम है,
    बेटे की बेगारी देख,
    अब माँ खुद बीमार है।
    जीने को बेचैन एक माँ-बेटे का यह हाल है,
    तो सोचो, भारत माँ के लाखों करोड़ों गरीब माँ-बेटों का क्या हाल है।

    ऐ सरकार कब सुनोगे,
    इन मां बेटों के दुःख कब हरोगे?
    एक इम्तिहान ठीक से करा नहीं सकते,
    लेकिन अपने-अपने बेटों को चटपट सेट कर देते,
    चलो ठीक है, अपने बेटों के पेट की सब को चिंता है,
    पर भारत मां के इन तमाम पेटों में लाथ मार कर, उनकी मां की दुआ नाकाम क्यों करते?
    मां है भाई, उनकी भी मां का बराबर महत्व है भाई, उसकी दुवा को सलाम कर दो भाई,
    उनके बच्चों का इम्तिहान सारणिबद्ध सलिका से चला दो भाई,
    इस तरह अपनी मां और भारत माता के सपूत होने का अपने देशवासियों को नायाब प्रमाण दे दो भाई।।

    माँ परेशान है, उनकी दुआ भी नाकाम है,
    बेटे की बेगारी देख,
    अब माँ खुद बीमार है।

    ==> भारत तुझे शांति मिले, संपूर्ण विश्व को शांति, - यही हमारी कामना है।